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संजय


संजय संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्जय]..१. धृतराष्ट्र का मंत्री जो महाभारत के युद्ध के स [..]

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संजमी


संजमी संज्ञा पुं॰ [सं॰ संयमिन्]..१. नियम से रहनेवाला । संयमी ।..२. व्रती ।..३. जित [..]

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संजमनीपति


संजमनीपति संज्ञा पुं॰ [सं॰ संयमनीपति] यमराज । यमदेव । (डिं॰) ।

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संजमनी


संजमनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ संयमनी] यमराज की नगरी । (डिं॰) ।

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संजमना


संजमना पु क्रि॰ स॰ [सं॰ संयमन] एकत्र करना । बटोरना । संयमित करना । व्यवस्थित क [..]

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संजम


संजम पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ संयम] दे॰ 'संयम' । उ॰—राम करहु सब संजम आजू । जौं विधि क [..]

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संजनी


संजनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] वैदिक काल का एक प्रकार का अस्त्र जिससे वध या हत्या [..]

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संजनित


संजनित वि॰ [सं॰ सञ्जनित] उत्पन्न किया हुआ । निर्मित । रचित [को॰] ।

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संजनन


संजनन ^२ संज्ञा पुं॰..१. निर्माण । उत्पान ।..२. बढ़ाव । विकास [को॰] ।

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संजन


संजन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्जन]..१. बाँधने की क्रिया ।..२. बंधन ।..३. बिखरे हूए अंगों [..]

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संज


संज ^३ संज्ञा पुं॰ झाँझ या मजीरा नामक वाद्य [को॰] ।

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संछेद्य


संछेद्य संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्छेद्य]..१. छेदने के योग्य ।..२. दो नदियों का साथ बहन [..]

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संछेद


संछेद संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्छेद]..१. काटना । अलग करना ।..२. हटाना । दूर करना [को॰] ।

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संछेत्ता


संछेत्ता संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्छेतृ] वह जो संशय आदि को दूर करता या मिटाता हो [को [..]

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संछेत्तव्य


संछेत्तव्य वि॰ [सं॰ सञ्छेत्तव्य] जो छेदन के योग्य हो । भेद्य [को॰] ।

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संछिन्न


संछिन्न वि॰ [सं॰ सञ्छिन्न] टुकड़े टुकड़े किया हुआ । छिन्न । काटा हुआ [को॰] ।

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संछिदा


संछिदा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्छिदा] विध्वंस । नाश [को॰] ।

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संछादनी


संछादनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्छादनी]..१. वह जो संछादन करे ।..२. त्वचा । खाल [को॰] [..]

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संछादन


संछादन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्छादन] आच्छादित करना । छिपाना । ढँकना [को॰] ।

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संछर्द्दन


संछर्द्दन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्छर्दन] ग्रण में एक प्रकार का मोक्ष । विशेष—राह [..]

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संछन्न


संछन्न वि॰ [सं॰ सम् + छन्न]..१. पूर्णतः ढँका हुआ । आवृत । वस्त्राच्छादित ।..२. छिप [..]

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संचोदित


संचोदित वि॰ [सं॰ सञ्चोदित] उत्तेजित । आदिष्ट । प्रेरित [को॰] ।

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संचोदना


संचोदना संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्चोदना]..१. वह वस्तु जो प्रेरणा वा उत्तेजना प्र [..]

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संचोदन


संचोदन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चोदन] प्रेरित करना । बढ़ावा देना या उत्तेजित करना [..]

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संचोदक


संचोदक संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चोदक]..१. ललितविस्तर के अनुसार एक देवपुत्र का नाम ।

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संचेय


संचेय वि॰ [सं॰ सञ्चेय] इकट्ठा करने योग्य । संग्रहणीय [को॰] ।

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संचूर्णित


संचूर्णित वि॰ [सं॰ सञ्चूर्णित] पिसा हुआ । टुकड़े टुकड़े किया हुआ । चूर्ण किय [..]

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संचूर्णन


संचूर्णन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चूर्णन] अच्छी तरह चूर करना, टुकड़े टुकड़े करना [..]

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संचु


संचु संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्जु] टीका । व्याख्या [को॰] ।

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संचित्रा


संचित्रा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्चित्रा] मूषाकर्णी । मूसाकानी ।

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संचिति


संचिति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्चिति]..१. एक पर एक रखना । तही लगना ।..२. संग्रह । सं [..]

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संचिता


संचिता संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्चिता] एक प्रकार की वनस्पति ।

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संचित


संचित वि॰ [सं॰ सञ्चित]..१. संचय किया हुआ ।..२. ढेर लगाया हुआ ।..३. गिना हुआ । गणना क [..]

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संचिंतित


संचिंतित वि॰ [सं॰ सञ्चिन्तित]..१. सम्यक् विचारित । सुविचारित ।..२. निश्चित किय [..]

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संचिंतन


संचिंतन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चिन्तन] चिंतन करना । विचारना [को॰] ।

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संचाली


संचाली संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सञ्चाली] गुंजा । घुँघची ।

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संचालन


संचालन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चालन]..१. चलाने की क्रिया । परिचालन ।..२. काम जारी रख [..]

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संचालक


संचालक संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चालक]..१. वह जो संचालन करता हो । चलाने या गति देनेवा [..]

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संचाल


संचाल संज्ञा पुं॰ [सं॰ सञ्चलन]..१. कंपन । काँपना ।..२. चलन । चलना ।

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संचारी


संचारी ^२ वि॰ [वि॰ स्त्री॰ सञ्चारिणी]..१. संचरण करनेवाला । गति- शील । अस्थिर ।..२. [..]



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