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संतृप्ति


संतृप्ति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सम् + तप्ति] पूर्ण संतुष्ट होने का भाव । संतुष्ट [..]

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संतृप्त


संतृप्त वि॰ [सं॰ सम् + तप्त] पूर्ण रूप से तुप्त या अघाया हुआ ।

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संतृण्ण


संतृण्ण वि॰ [सं॰ सम् + तृण्ण]..१. परस्पर बँधा हुआ या संलग्न । जुड़ा हुआ ।..२. आच्छ [..]

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संतुष्टि


संतुष्टि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्तुष्टि] संतुष्ट होने का भाव ।..२. इच्छा की पूर [..]

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संतुष्ट


संतुष्ट वि॰ [सं॰ सन्तुष्ट]..१. जिसका संतोष हो गया हो । जिसकी तृप्ति हो गई हो । त [..]

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संतुषित


संतुषित संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तुषित] ललितविस्तर के अनुसार एक देवपुत्र का नाम ।

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संतुलित


संतुलित वि॰ [सं॰ सन्तुजित]..१. ठीक ढंग से तौला हुआ ।..२. समान अनुपात का । पूर्ण नि [..]

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संतुलन


संतुलन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तुलन]..१. तौल । वजन ।..२. आपेक्षिक भार बराबर होना । ठी [..]

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संती


संती पु † ^२ अव्य॰ [प्रा॰ सुन्तो] से । द्वारा । उ॰—सो न डोल देखा गजपती । राजा सत [..]

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संतितहोम


संतितहोम संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तति होम] वैदिक काल का एक प्रकार का यज्ञ जो संतान [..]

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संति


संति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्ति]..१. दान । भेंट । अँकोर ।..२. अवसान । अंत । समाप्ति [..]

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संतावना


संतावना पु सं॰ क्रि॰ [हिं॰ संतापना] दे॰ 'संतापना' । उ॰—जिव दे जिव संतावते पलटू [..]

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संताव


संताव संज्ञा पुं॰ [सं॰]..१. यज्ञ में स्तुति करनेवाले ब्राह्मणों की अवस्थान भू [..]

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संतार


संतार संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तार]..१. पार करना । पार जाना ।..२. नदी आदि का वह छिछला स [..]

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संताप्य


संताप्य वि॰ [सं॰ सन्ताप्य]..१. जलाने के योग्य ।..२. कष्ट या दुःख देने के योग्य । त [..]

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संतापी


संतापी संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तापिन्] वह जो संतप्त करता हो । संताप देनेवाला । दु [..]

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संतापित


संतापित वि॰ [सं॰ सन्तापित]..१. जिसे बहुत संताप पहुँचाया गया हो । पीड़ित । संतप [..]

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संतापवत्


संतापवत् संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तापवत्] संताप या कष्ट से युक्त । जिसे संताप हो [क [..]

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संतापना


संतापना पु् † क्रि॰ स॰ [सं॰ सन्तापन] संताप देना । दुःख देना । कष्ट पहुँचाना । [..]

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संतापन


संतापन ^२ वि॰..१. ताप पहुँचानेवाला । जलानेवाला ।..२. दुःख देनेवाला । कष्ट पहुँच [..]

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संताप


संताप संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्ताप] अग्नि या धूप आदि का ताप । जलन । आँच ।..२. दुःख । कष [..]

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संतानी


संतानी संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तानिन्] अविच्छिन्न विचारप्रवाह का विषय या वस्तु [ [..]

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संतानिनी


संतानिनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्तानिनी] मलाई । साढ़ी [को॰] ।

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संतानिका


संतानिका संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्तानिका]..१. क्षीर सागर ।..२. चाकू का फल ।..३. फेन [..]

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संतानिक


संतानिक वि॰ [सं॰ सन्तानिक] [वि॰ स्त्री॰ संतानिका] कल्पवृक्ष के पुष्पों से नि [..]

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संतानसंघि


संतानसंघि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्तानसन्धि] कामंदकीय नीति के अनुसार वह संधि [..]

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संतानक


संतानक ^२ संज्ञा पुं॰..१. कल्पवृक्ष । देवतरु ।..२. पुराणानुसार एक लोक जो ब्रह्म [..]

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संतान


संतान गोपाल संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तान गोपाल] संतति देनेवाले कृष्ण । वासुदेव कृ [..]

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संतस्थान


संतस्थान संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तस्थान] संतों के रहने का स्थान । साधुओं का निवा [..]

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संतर्पित


संतर्पित वि॰ [सं॰ सन्तर्पित] संतुष्ट एवं तृप्त किया हुआ [को॰] ।

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संतर्पण


संतर्पण संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तर्पण]..१. जो भली भाँति तुप्त करता हो । वह जो प्रसन [..]

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संतर्पक


संतर्पक वि॰ [सं॰ सन्तर्पक] संतुष्ट या प्रसन्न करनेवाला । तृप्त करनेवाला ।

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संतर्द्दन


संतर्द्दन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तदुर्दन] भागवत के अनुसार राजा धृष्टकेतु के एक [..]

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संतर्जना


संतर्जना संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्तर्जना] संतर्जन की क्रिया । धमकी [को॰] ।

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संतर्जन


संतर्जन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तर्जन]..१. डाँट डपट करना । भर्त्सना करना । डराना ध [..]

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संतरी


संतरी संज्ञा पुं॰ [अं॰ सेंटरी]..१. किसी स्थान पर पहरा देनेवाला सिपाही । पहरेदा [..]

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संतरा


संतरा संज्ञा पुं॰ [पुर्त्त॰ संगतरा] एक प्रकार का बड़ा और मीठा नीबू । बड़ी नार [..]

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संतरण


संतरण ^२ वि॰..१. तारनेवाला । पार करनेवाला । तारक ।..२. नष्ट करनेवाला । नाशक ।

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संतरंगा


संतरंगा ^२ संज्ञा पुं॰ इंद्रधनुष जिसमें सात रंग होते हैं ।

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संतमस्


संतमस् संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तमस्]..१. अंधकार । तम । अँधेरा ।..२. मोह ।

Panna
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