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संदर्श


संदर्श संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्दर्श] झलक । दृश्य [को॰] ।

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संदर्भ


संदर्भ संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्दर्भ]..१. रचना । बनावट ।..२. साहित्यिक रचना या ग्रंथ [..]

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संदर्प


संदर्प संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्दर्प] घमंड । गरूर [को॰] ।

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संदंशित


संदंशित वि॰ [सं॰ सन्दंशित] जो कवच धारण किए हो । कवच- युक्त ।

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संदंशिका


संदंशिका संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्दशिका]..१. सँड़सी ।..२. चिमटी ।..३. कैची ।..४. (चोंच से) [..]

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संदंशक


संदंशक संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्दंशक]..१. सँड़सी ।..२. चिमटा [को॰] ।

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संदंश


संदंश संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्दंश]..१. सँडसी नाम का लोहे का औजार ।..२. न्याय या तर्क क [..]

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संद


संद पु ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ समन्दन] एक ऋषि । सनंदन ऋषि ।

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संथाली


संथाली ^२ संज्ञा स्त्री॰..१. संथाल जाति की स्त्री ।..१. संथालों की भाषा ।

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संथाल


संथाल संज्ञा स्त्री॰ [देश॰]..१. बिहार का एक परगना ।..२. बहाँकी एक आदिवासी जाति औ [..]

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संथान


संथान पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ संस्थान] दे॰ 'संस्थान' । उ॰—आसोंजै रानिंग राव परवत ब [..]

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संथा


संथा संज्ञा पुं॰ [सं॰ संहिता या संस्था]..१. चटसार । पाठशाला ।..२. एक बार में पढ़ा [..]

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संत्वरा


संत्वरा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्त्वरा] शीघ्रता । तत्परता । हड़बड़ी । जल्दबाज [..]

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संत्री


संत्री संज्ञा पुं॰ [अं॰ सेन्ट्री, हिं॰ संतरी] दे॰ 'संतरी' ।

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संत्रासित


संत्रासित वि॰ [सं॰ सन्त्रासित] त्रस्त किया हुआ । भयभीत किया हुआ [को॰] ।

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संत्रासन


संत्रासन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्त्रासन] [वि॰ संत्रासित] भयभीत या आतंकित करना [को [..]

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संत्रास


संत्रास संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्त्रास] भय । डर । त्रास [को॰] ।

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संत्राण


संत्राण संज्ञा पुं॰ [सं॰ संत्राण] रक्षा । उद्धार [को॰] ।

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संत्रस्त


संत्रस्त वि॰ [सं॰ संत्रस्त] अत्यंत भयभीत । डर से कंपित [को॰] । यौ॰—संत्रस्तगो [..]

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संत्याज्य


संत्याज्य वि॰ [सं॰ सन्त्याज्य] परित्याग करने योग्य । छोड़ देने लायक [को॰] ।

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संत्याग


संत्याग संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्त्याग] छोड़ देना । त्यागना [को॰] ।

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संत्यसंगर


संत्यसंगर ^१ वि॰ [सं॰ सत्सङ्गर] दे॰ 'सत्यव्रत' या 'सत्य- संकल्प'[को॰] ।

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संत्यजन


संत्यजन संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्त्यजन] त्याग करना । छोड़ना [को॰] ।

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संत्यक्त


संत्यक्त वि॰ [सं॰ सम्त्यक्त]..१. पूर्णतः परित्यक्त या छोड़ा हुआ । त्यक्त ।..२. व [..]

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संत्य


संत्य संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्त्य] अग्निदेव का एक नाम जो सब प्रकार के फल देनेवाले [..]

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संतोष्य


संतोष्य वि॰ [सं॰ सन्तोष्य] संतोष करने के योग्य ।

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संतोषी


संतोषी संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तोषिन्]..१. वह जो सदा संतोष रखता हो । जिसे बहुत लालस [..]

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संतोषित


संतोषित ^२ वि॰ [सं॰ संतोष, सं॰ सन्तुष्ट] जिसका संतोष हो गया हो । संतुष्ट । उ॰—न [..]

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संतोषना


संतोषना ^२ क्रि॰ अ॰ संतुष्ट होना । प्रसन्न होना ।

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संतोषन


संतोषन † वि॰ स्त्री॰ [सं॰ सन्तोषिन्] जो संतोष करती हो । संतोष करनेवाली । उ॰—ग [..]

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संतोषणीय


संतोषणीय वि॰ [सं॰ सन्तोषणीय]..१. संतोष करने योग्य ।..२. संतोष कराने योग्य ।

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संतोषण


संतोषण संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तोषण] संतुष्ट या प्रसन्न करने का भाव । दे॰ 'संतोष' [..]

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संतोषक


संतोषक वि॰ [सं॰ सन्तोषक] संतोष देनेवाला । संतोषदायक [को॰] ।

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संतोष


संतोष संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तोष]..१. मन की वह वृत्ति या अवस्था जिसमें मनुष्य अपन [..]

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संतोखी


संतोखी † वि॰ [सं॰ सन्तोषिन्] दे॰ 'संतोषी' ।

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संतोख


संतोख पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ सन्तोष] दे॰ 'संतोष' ।

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संतृप्ति


संतृप्ति संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सम् + तप्ति] पूर्ण संतुष्ट होने का भाव । संतुष्ट [..]

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संतृप्त


संतृप्त वि॰ [सं॰ सम् + तप्त] पूर्ण रूप से तुप्त या अघाया हुआ ।

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संतृण्ण


संतृण्ण वि॰ [सं॰ सम् + तृण्ण]..१. परस्पर बँधा हुआ या संलग्न । जुड़ा हुआ ।..२. आच्छ [..]

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संतुष्टि


संतुष्टि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ सन्तुष्टि] संतुष्ट होने का भाव ।..२. इच्छा की पूर [..]



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